छत्तीसगढ़रायपुर

छत्तीसगढ विधान सभा में आज मीडिया प्रतिनिधियों के लिए ’’संसदीय रिपोर्टिग’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया , डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, सांसद, राज्यसभा एवं डॉ. संजय द्विवेदी, आईआईएमसी पूर्व निदेशक ने व्याख्यान प्रस्तुत किये।

जनता का विधान मंडल के प्रति आस्था एवं विश्वास बढ़े इस दृश्टिकोण से जनसंचार के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है : डॉ. रमन सिंह

रायपुर, 5 जुलाई 2025// छत्तीसगढ विधान सभा परिसर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी, प्रेक्षागृह में आज मीडिया प्रतिनिधियों के लिए ’’संसदीय रिपोर्टिग’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस कार्यशाला का शुभारम्भ मान. विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं मान. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया । इस अवसर पर मान. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत एवं मान. संसदीय कार्यमंत्री श्री केदार कश्यप, विधान सभा सचिव दिनेश शर्मा एवं पत्रकार दीर्घा सलाहकार समिति के संयोजक उपस्थित थे । ’’संसदीय रिपोर्टिंग’’ विशय पर डॉ. संजय द्विवेदी, पूर्व निदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान एवं प्रोफेसर माखन लाल चतुर्वेदी, राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्व विद्यालय, भोपाल एवं समापन सत्र में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, सांसद, राज्यसभा ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। इस आयोजन में बडी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि-जनतंत्र में विधान मण्डल तथा जनसंचार दोनों के ही सरोकार जनहित से जुड़े हैं। सरकार बनने के बाद सबसे पहले मंत्रियों का आई. आई. एम. में प्रशिक्षण हुआ फिर मान. विधायकों के लिए विधानसभा में प्रबोधन कार्यक्रम और तीसरे चरण में मान. विधायकों के निज सचिव/ निज सहायक के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया और अब मीडिया प्रतिनिधियों के लिए ’’संसदीय रिपोर्टिग’’ विशय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है । उन्होंने कहा कि-जनतंत्र में विधान मंडल तथा जनसंचार दोनों के ही सरोकार जनहित से जुडे हुए हैं । जनता का विधान मंडल के प्रति आस्था एवं विश्वास बढ़े इस दृश्टिकोण से जनसंचार के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । उन्हांने यह भी कहा कि-आसंदी में सभा की सार्वभौमिकता की शक्ति निहित होती है, इसलिए जनसंचार के प्रतिनिधियों के लिए यह आवश्यक है कि वे सभा की कार्यवाही अपनी कल्पना अथवा संभावनाओं के आधार पर प्रचारित प्रसारित न करें । संसदीय रिपोर्टर के लिए यह आवश्यक है कि उसे संसदीय शब्दावली, संसदीय प्रक्रिया एवं नियमों का ज्ञान होना भी आवश्यक है । उन्हांने जनसंचार माध्यमों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे भावुकता या रोश में सभा की बाधित कार्यवाही को नकारात्मक स्वरूप में प्रस्तुत करने के बजाए सभा में होने वाले संसदीय कार्यो को प्रमुखता के साथ प्रकाशित एवं प्रसारित करें ।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि-प्रदेश विधान सभा ने 25 वर्षां की गौरवमयी यात्रा पूरी की और लोकतान्त्रिक मूल्यों को सुदृढ़ किया । उन्होंने कहा कि-यह कार्यशाला पत्रकारों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी और इसके माध्यम से विधान सभा की गतिविधियॉ प्रभावी रूप से जनता तक पहुचेगी । उन्होंने कहा कि-छत्तीसगढ़ विधान सभा में उत्कृष्ट मीडिया प्रतिनिधियों को ‘‘संसदीय रिपोर्टिंग पुरस्कार’’ भी दिये जाते हैं। उन्होंने कहा कि-संसदीय रिपोर्टिंग का कार्य अत्यंत उत्तरदायित्वपूर्ण है इसलिए पत्रकारों को विधानसभा में हंगामा के समय इसके सकारात्मक पहलू एवं महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा को भी प्रमुखता से स्थान दें।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि- संसदीय रिपोर्टिंग के व्यवहारिक पहलूओं पर ध्यान केन्द्रित करते हुए उसमें खुलापन लाया जाना चाहिए जिससे जनता अपने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से परिचित हो सके ।
कार्यक्रम के विशय पर प्रकाश डालते हुए विधान सभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा ने कहा कि-संसदीय रिपोर्टिंग में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रजातंत्र की इस सर्वोच्च सार्वभौम संस्था की गरिमा एवं सम्मान को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे और जनसामान्य को सभा की कार्यवाही का वैसा ही वृतांत प्राप्त हो जैसा सभा के अन्दर संपादित हुआ है । उन्होंने छत्तीसगढ़ विधान सभा की गौरवशाली उपलब्धियों की जानकारी भी प्रस्तुत की ।

कार्यशाला के प्रथम सत्र को सम्बोधित करते हुए डॉ. संजय द्विवेदी, पूर्व निदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान एवं प्रोफेसर माखन लाल चतुर्वेदी, राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्व विद्यालय, भोपाल ने सभा में तारांकित, अतारांकित प्रश्न, व्यवस्था एवं औचित्य के प्रश्न, बजट की कव्हरेज, शून्यकाल, कटौती प्रस्ताव, मान. अध्यक्ष की व्यवस्था, कार्यवाही का विलोपन इत्यादि विशय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया । उन्होंने कहा कि-छत्तीसगढ़ की विधान सभा अपना रजत जयंती वर्ष मना रही है और यह हिदीं पत्रकारिता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है कि हमारे देश में हिदीं पत्रकारिता अपने 200 वर्ष पूरी कर रही है। उन्हांने कहा कि-हमारा संचार एवं संवाद हमेशा लोक मंगल के लिए होता है जबिक पश्चिमी परंपरा में खींचतान की परंपरा है । उन्हांने कहा कि-संसदीय रिपोर्टिंग अत्यंत गहरा उत्तरदायित्व है, जहां भाषा, अनुशासन एवं मर्यादा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होने कहा कि-यदि हम अपनी जमीन छोड़गे तो हमारा जमीन नही बचेगा । उन्हांने कहा कि-संसदीय रिपोर्टिंग में ब्रेकिंग न्यूज पूरे विश्लेषण के पश्चात ही आम जनों तक आनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि-सदन की चर्चा में नोकझोक के साथ-साथ सार्थक चर्चा को भी स्थान दिया जाना चाहिए।

कार्यशाला के समापन सत्र में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, सांसद, राज्यसभा ने व्यवहारिक पहलुओं पर केन्द्रित करते हुए संसदीय रिपोर्टिं रिपोर्टिंग के संबंध में सारगर्भित जानकारी रोचक शैली में प्रस्तुत की । उन्हांने कहा कि-पहले छत्तीसगढ़ राज्य समस्याओं का गढ़ माना जाता था लेकिन आज छत्तीसगढ़ ने पूरे में विकास के नये सोपान तय कर लिये हैं । उन्हांने कहा कि-आज सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होने के कारण पत्रकारों का काम अत्यंत जटिल हो गया है । चूंकि जनता को सदन की कार्यवाही के सीधे प्रसारण से सूचना और जानकारी तो मिल जाती है लेकिन आम जनता उस चर्चा एवं घटनाक्रम का विश्लेशण भी चाहती है । उस चर्चा का इतिहास एवं पृष्ठभूमि भी चाहती है । उन्हांने कहा कि-संसद का कानून मानना हर विधान मंडल की बाध्यता है । लेकिन कुछ राज्यों की विधान सभाऐं अपनी कार्यवाही स्वयं के तरीके से करती है, ऐसी स्थिति में संसदीय पत्रकारों के लिए रिपोर्टिंग का काम थोड़ा जटिल हो जाता है । उन्हांने कहा कि-जब कहीं तेजी से विकास होता है तो कुछ लोग उसे रोकने का प्रयास भी करते हैं लेकिन इसके पश्चात भी हमोर देश नें विश्व गुरू बनकर अपनी उत्तरोत्तर स्वीकार्यता का प्रमाण प्रस्तुत किया है ।

इस अवसर पर दोनो प्रमुख वक्ताओं डॉ. संजय द्विवेदी, पूर्व निदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान एवं प्रोफेसर माखन लाल चतुर्वेदी, राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्व विद्यालय, भोपाल एवं डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, सांसद, राज्यसभा का शाल, श्रीफल से सम्मानित किया।

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