रायपुर

एनआईटी रायपुर में यौन उत्पीड़न निवारण सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता अभियान एवं संगोष्ठी का किया गया आयोजन आयोजन

रायपुर, 21 दिसंबर 2025  //राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में 10 से 17 दिसंबर 2025 तक यौन उत्पीड़न निवारण सप्ताह 2025 का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) द्वारा जागरूकता एवं संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें प्रतियोगिताएं, जागरूकता गतिविधियां तथा यौन उत्पीड़न निवारण पर आधारित संगोष्ठी शामिल रही।

सप्ताहभर चले इस अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यौन उत्पीड़न निवारण विषय पर संगोष्ठी रहा, जो डॉ. एन. वी. रमणा राव, निदेशक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के संरक्षण में आयोजित की गई।

संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. साधना अग्रवाल, अध्यक्ष, आंतरिक शिकायत समिति, एनआईटी रायपुर ने की। इस अवसर पर डॉ. विनिता सिंह, प्रोफेसर एवं प्रभारी, फेटल मेडिसिन यूनिट, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। श्रीमती आराधना चौबे, पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा श्रीमती ज्योति नरापराजु, सचिव, आशीर्वाद (एनआईटी लेडीज कमेटी), सम्मानित अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुईं।

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. साधना अग्रवाल ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के प्रति निरंतर जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया और संस्थान की शून्य सहनशीलता नीति को दोहराया। उन्होंने बताया कि सप्ताहभर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से परिसर समुदाय को संवेदनशील बनाया गया।

अपने संबोधन में श्रीमती आराधना चौबे ने समाज में जागरूकता और महिलाओं के प्रति सम्मान की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सम्मान और समानता के बिना सामाजिक प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कानून निष्पक्ष है और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध एवं निष्पक्ष निपटारा अनिवार्य है।

मुख्य वक्तव्य में डॉ. विनिता सिंह ने यौन उत्पीड़न के चिकित्सीय एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इसका प्रभाव केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा पड़ता है तथा कुछ मामलों में पुरुष भी इसके शिकार हो सकते हैं। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता, सर्वाइकल कैंसर जागरूकता, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस टीकाकरण, स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम एवं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की।

श्रीमती ज्योति नरापराजु ने इस पहल की सराहना करते हुए बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही सम्मान, उचित व्यवहार तथा अच्छे और बुरे स्पर्श की समझ विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार पर चुप रहने के लिए प्रेरित नहीं किया जाना चाहिए।

द्वितीय सत्र में विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। डॉ. वरुण आनंद, अतिरिक्त प्रोफेसर, बाल आपातकालीन चिकित्सा, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर, ने बाल स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। डॉ. सुरभि दुबे, सह-प्राध्यापक, मनोचिकित्सा विभाग, पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर, ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल तनाव एवं कार्य–जीवन संतुलन पर अपने विचार साझा किए। वहीं डॉ. निवेदिता चौबे, बाल रोग विशेषज्ञ एवं विजिटिंग कंसल्टेंट, शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, रायपुर, ने बाल देखभाल एवं पोषण से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का संवेदनशीलता एवं स्पष्टता के साथ समाधान किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. मृदु साहू द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन यौन उत्पीड़न निवारण, कानूनी प्रावधानों, महिलाओं के स्वास्थ्य एवं मानसिक कल्याण के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ, जिससे एनआईटी रायपुर की सुरक्षित एवं समावेशी परिसर के प्रति प्रतिबद्धता पुनः सुदृढ़ हुई।

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