
चार श्रम संहिताओं पर मीडिया कार्यशाला वार्ता का आयोजन , ईपीएफओ और ईएसआईसी योजनाओं सहित श्रम कानूनों के प्रावधानों पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
रायपुर ,22 दिसंबर 2025 // केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत किए गए महत्वपूर्ण श्रम सुधारों के संबंध में मीडिया को जागरूक एवं संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से आज रायपुर स्थित पीडब्ल्यूडी न्यू सर्किट हाउस में एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान गिग वर्कर्स एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज, न्यूनतम मजदूरी को वैधानिक समर्थन, समान कार्य के लिए समान वेतन, महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षित एवं समान कार्य वातावरण, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों का सुदृढ़ीकरण तथा निश्चित अवधि के रोजगार (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट) जैसे प्रमुख श्रम सुधारों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस वार्ता कार्यक्रम का उद्देश्य मीडिया प्रतिनिधियों को श्रम संहिताओं के प्रावधानों, उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव तथा श्रमिकों और उद्योगों को होने वाले लाभों की समुचित जानकारी प्रदान करना था, ताकि इन सुधारों का संदेश प्रभावी रूप से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।
कार्यशाला में श्रम विभाग के क्षेत्रीय श्रम आयुक्त अंकुर शर्मा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के आयुक्त गौरव डोगरा तथा कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के उप निदेशक धीरेंद्र पटनायक प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पीआईबी के उप निदेशक ने श्रम सुधारों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पुराने, जटिल और औपनिवेशिक काल से चले आ रहे 29 श्रम कानूनों को समाहित कर 4 सरल, आधुनिक और श्रमिक-केंद्रित श्रम संहिताओं के रूप में परिवर्तित किया है।
क्षेत्रीय श्रम आयुक्त अंकुर शर्मा ने कहा कि मजदूरी संहिता के माध्यम से न्यूनतम मजदूरी को वैधानिक आधार प्रदान किया गया है तथा समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को सुदृढ़ किया गया है। औद्योगिक संबंध संहिता औद्योगिक शांति, विवादों के त्वरित समाधान और निश्चित अवधि के रोजगार को बढ़ावा देती है। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता के तहत कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों को मजबूत किया गया है और महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित किया गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के माध्यम से गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।
EPFO आयुक्त गौरव डोगरा ने कहा कि डिजिटलीकरण के कारण ईपीएफ सेवाएं पहले से कहीं अधिक सरल और पारदर्शी हो गई हैं। यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से श्रमिक अपने पीएफ खाते की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं, क्लेम की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं और समय पर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को मान्यता मिलने से ऐसे श्रमिकों को भी भविष्य निधि जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्राप्त होंगी, जो पहले इससे वंचित थे।
ESIC के उप निदेशक धीरेंद्र पटनायक ने बताया कि ईएसआईसी योजना श्रमिकों और उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधाएं, मातृत्व लाभ, बीमारी एवं दुर्घटना की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता के लागू होने से ईएसआईसी का दायरा और विस्तृत हुआ है तथा नेटवर्क के विस्तार से अधिक श्रमिकों को इसका लाभ मिल सकेगा।
कार्यशाला का समापन पत्रकारों और विशेषज्ञों के साथ प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ। अधिकारियों ने कहा कि मीडिया की सक्रिय भूमिका से श्रम सुधारों और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी जनसामान्य तक पहुँचेगी, जिससे श्रमिकों और उद्यमियों दोनों को सरकार की नीतियों का अधिकतम लाभ मिल सकेगा।




